उठना हैं हमे - SeekNLearn.in

कैसे कोई आवाज उठाये,
सब गिरे हुवे नीचे,
कोई बढ़े तोह,
दूसरा खींचे पीछे ।
उम्मीद नहीं आँखों में,
हिम्मत कहाँ से आए,
उम्मीद आँखों में आए तोह,
नज़र चली जाए ।
करना क्या हाथो से,
किसमत पे छोड़े,
ऐसे ही जिंदिगी गुज़ार के,
यह दुनिया छोड़े ।
किशिको अगर उठना हो,
जी जान से लड़ो,
सामने आये कुछ भी,
अपने हाथों से तोड़ो ।
यही समय काम का,
किस्मत पे ना छड़ो,
जिंदिगी एक ही बारी,
हर लड़ाई से लड़ो ।
उठना हैं हमे ,
गिरे हुए से,
उड़ना हैं हमे,
अशमान से ।
एक कदम आगे,
और एक आगे,
मिलाते जाओ कदम से कदम ,
बढ़ जाओ आगे ।
सीमा नहीं इस जहाँ की,
तोह हम क्यों रुके,
कोई हज्मसे कम न ज्यादा,
तोह हम क्यों जूके ।


2 Comments

Carmela · 03/02/2017 at 5:30 PM

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The clearness in your post is simply spectacular and i could
assume you are an expert on this subject. Fine with your permission let
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Thanks a million and please continue the rewarding work.

Chrinstine · 05/02/2017 at 5:43 PM

Hello, I log on to your new stuff on a regular basis. Your humoristic style
is awesome, keep it up!

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